भाग 1.भारतीय कानून :प्राचीन काल और वैदिक युग|
भारतीय कानून की जडे प्राचीन भारतीय से जुडी हुई है| हडप्पा काल से भारत मे एक सुव्यवस्थित तन्त्र था|वैदिक काल(इ.पू१५००-५००) मे कानून मुख्य रूप से धार्मिक ग्रंथो और परंपरा पर आधारित था| ऋग्वेद,यजुर्वेद जैसे वेदों में सामाजिक नियमों का उल्लेख है,जिनमे यज्ञ,नैतिक आचरण और सामाजिक कर्तव्यो का समावेश था| इस काल में कानून धर्म से अटूट रुप से जुडा था। ब्राह्मण का स्थान सर्वोच्च था| नियम सरल हुआ करते थे और मौखिक परंपराओं पर आधारित हुआ करते थे| विवादो का ज्यादातर समाधान स्थानिय स्तर पर होता था|

भाग 2.भारतीय कानून :मौर्य युग,धर्मसूत्र और स्मृति ग्रंथ|
मनुस्मृति,नारद स्मृति जैसे ग्रंथोने परिवार,विवाह,संपति,दंड जैसे नियम निर्धारित किए|गांव या छोटे कस्बों मे न्याय के लिए या फीर विवादों के लिए पंचायत को जवाबदारी दी गई थी| मौर्य साम्राज्य मे कानून को राजनीतिक और प्रशासनिक स्वरुप मिला| कौटिल्य का अर्थशास्त्र कर प्रणाली,साशन व्यवस्था के लिए संचार रुप बना| महान राजा सम्राट अशोक ने बौध्ध धर्म का अहिंसक कानून लागु किया|
भाग 3.भारतीय कानून : मध्यकाल और इस्लामी प्रभाव|
गुप्त साम्राज्य में कानून सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों से जुडा| गुप्त साम्राज्य के कालखंड के दौरान राजदरबार और पंचायते विवाद सुलजाते थे| व्यापार और कर प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए कानून विकसित किए| मध्यकाल में दिल्ही स्ल्तनत और मुगल साम्राज्य के आगमन कानून को नया रूप दिया| इस्लामी कानून (शरिया) लागू हुआ,लेकिन स्थानिक हिंदू परंपरा को भी मान्यता दी गइ| अकबर जैसे राजा के कारण धार्मिक सहिष्णुता को बढावा मिला तो औरंगजेब जैसे राजा के कारण हिंदू और मुसलमान के संबंध बिगडे| मुघल काल के दौरान फ़ौजदारी,जमीन और कर जैसे कानून को मजबूत बनाया गया जिससे प्रशासनिक ढांचा और मजबूत हुआ|
भाग 4. भारतीय कानून : ब्रिटिश युग और आधुनिक भारत|
ब्रिटिश शासन के दौरान (१७) में कानून को आधुनिक स्वरूप और व्यवस्थित रूप मिला| उस दौर मे ब्रिटिश इस्ट इंडिया कंपनी में इंग्लेड के कानून को भारत मे लागु किए|