धारा २ : भारतीय न्याय संहिता (BNS)

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 2 एक परिभाषा खंड है, जिसका अर्थ है कि यह संहिता में उपयोग किए गए विभिन्न महत्वपूर्ण शब्दों और वाक्यांशों को परिभाषित करती है। इसमें कई उप-धाराएं (sub-sections) हैं, जिनमें से प्रत्येक एक अलग शब्द या वाक्यांश को परिभाषित करती है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 2: परिभाषाएँ


भारतीय न्याय संहिता

भारतीय न्याय संहिता धारा 2 में कई महत्वपूर्ण परिभाषाएँ शामिल हैं जो पूरी संहिता को समझने के लिए आवश्यक हैं। कुछ प्रमुख परिभाषाएँ इस प्रकार हैं:

  • ‘कार्रवाई’ (Action): इस धारा में ‘कार्रवाई’ को परिभाषित किया गया है ताकि इसमें अवैध लोप (illegal omission) भी शामिल हो।
  • ‘चल संपत्ति’ (Movable Property): इसकी परिभाषा में मूर्त (tangible) और अमूर्त (intangible) संपत्ति दोनों शामिल हैं।
  • ‘सामुदायिक सेवा’ (Community Service): यह एक नई प्रकार की सज़ा है जिसे BNS में शामिल किया गया है, और इसे परिभाषित किया गया है।
  • ‘लिंग’ (Gender): इसकी परिभाषा में संशोधन करके इसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।
  • ‘संश्रय देना’ (Harbouring): इसमें किसी अपराधी को शरण देना, उसे आश्रय देना, भोजन, पेय, हथियार, या भागने के साधन उपलब्ध कराना शामिल है।
  • ‘छोटा संगठित अपराध’ (Petty Organized Crime): इसकी परिभाषा में धोखाधड़ी, परीक्षा प्रश्नपत्रों का लीक होना, टिकटों की अवैध बिक्री आदि जैसे अपराधों को शामिल किया गया है।
  • ‘सदोष अभिलाभ’ (Wrongful Gain) और ‘सदोष हानि’ (Wrongful Loss): ये भी संहिता में परिभाषित किए गए हैं।

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