By Sarika Bhanani
भारत में लाखों लोगों की रोजी-रोटी आज भी उनके अपने हुनर से चलती है। पीढ़ियों से चला आ रहा यही हुनर देश के अनगिनत परिवारों का असली सहारा है—चाहे वह सिलाई करता दर्जी हो, लकड़ी को आकार देता बढ़ई, या आग में लोहा तपाता लोहार। काम भले ही छोटा लगे, पर इसी से घर का चूल्हा जलता है। लेकिन क्या सिर्फ हुनर और ग्राहक होना ही कारोबार की सफलता के लिए काफी है? जब पुराने औजार काम में रुकावट बनने लगें और हाथ में नई मशीन खरीदने की पूंजी न हो, तो हुनर भी लाचार लगने लगता है।
इसी लाचारी को मजबूती में बदलने के लिए केंद्र सरकार ने 17 सितंबर 2023 को PM Vishwakarma Yojana की शुरुआत की थी। आज 3 साल बाद सरकार 30 लाख रजिस्ट्रेशन, 24 लाख से ज्यादा ट्रेंड कारीगर और 18 लाख से अधिक टूलकिट बांटने का दावा कर रही है। आंकड़े भले ही काफी बड़े नजर आते हों, लेकिन कागजी दावों से इतर एक आम कारीगर के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है—इस योजना से उसकी जिंदगी में ज़मीन पर कितना बदलाव आया और आवेदन के बाद उसे वाकई क्या मिलता है?
योजना का दायरा: आखिर किसे मिलेगा इसका लाभ?
अगर आप अपने हाथों के हुनर और पारंपरिक औजारों से रोजी-रोटी कमाते हैं, तो यह योजना खास आपके लिए ही बनाई गई है। सरकार ने इसके तहत 18 अलग-अलग पारंपरिक पेशों को जोड़ा है—जिसमें मिट्टी ढालते कुम्हार से लेकर कपड़े सिलते दर्जी, लकड़ी को रूप देते बढ़ई, लोहे को आकार देते लोहार, बाल काटते नाई और ईंटें चुनते राजमिस्त्री तक शामिल हैं।
यहां एक बात समझना जरूरी है। सिर्फ किसी ट्रेड का नाम सूची में होना पर्याप्त नहीं है। आवेदक वास्तव में संबंधित काम कर रहा हो और योजना की निर्धारित पात्रता एवं सत्यापन प्रक्रिया पूरी करता हो, तभी आगे लाभ मिल सकता है। कागजों में काम दिखाने या सिर्फ फॉर्म भर देने से बात नहीं बनेगी, ज़मीनी जांच के बाद ही योजना के दरवाजे खुलते हैं।
सरकार ने इसके लिए ₹13,000 करोड़ का बड़ा बजट तय किया है। सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र कारीगर को PM Vishwakarma Certificate और ID Card भी दिया जाता है, जिससे उसके पारंपरिक काम को सरकारी पहचान मिलती है।
औजारों पर मिलने वाली मदद: क्या और कैसे मिलेगा?
एक कारीगर के लिए उसके औजार सिर्फ सामान नहीं होते, बल्कि उसकी रोज़ी-रोटी की असली पूंजी होते हैं। कपड़ा सिलने वाले दर्जी की सिलाई मशीन खराब हो जाए, बढ़ई की आरी पुरानी पड़ जाए या लोहार का उपकरण जवाब दे दे, तो मेहनत दोगुनी हो जाती है और दिनभर की कमाई पर सीधा असर पड़ता है।
इसी जरूरत को समझते हुए PM Vishwakarma योजना में पात्र कारीगरों के हाथ मजबूत करने के लिए ₹15,000 तक की Toolkit Incentive का प्रावधान किया गया है।
लेकिन यहां अक्सर लोगों में भ्रम रहता है कि खाते में सीधे 15 हजार रुपये नकद आएंगे—जो कि सही नहीं है। सरकार यह मदद e-voucher के रूप में देती है, ताकि इसका इस्तेमाल किसी अन्य काम के बजाय अपने व्यवसाय से जुड़े जरूरी और आधुनिक औजार खरीदने में किया जा सके।
यानी सरकार का मकसद सिर्फ पैसा देना नहीं, बल्कि कारीगर के हाथ में बेहतर औजार पहुंचाना है।
15 सितंबर 2026 तक के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में 18.16 लाख से अधिक कारीगरों को यह टूलकिट सहायता दी जा चुकी थी।
हुनर को नया निखार: Training और ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड
कई कारीगर अपने काम में वर्षों से माहिर होते हैं, लेकिन समय के साथ बाज़ार की मांग, मशीनें और ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। इसी वजह से PM Vishwakarma योजना में सिर्फ औजार देने पर नहीं, बल्कि कौशल को और निखारने पर भी खास जोर दिया गया है।
इसके तहत 5 से 7 दिनों की Basic Training दी जाती है, जबकि एडवांस काम सीखने के इच्छुक कारीगरों के लिए 15 दिन या उससे अधिक की Advanced Training का विकल्प भी है।
प्रशिक्षण के दिनों में रोज़ी-रोटी प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार प्रतिदिन ₹500 का स्टाइपेंड देती है।
इस ट्रेनिंग में आधुनिक औजार चलाने के साथ-साथ डिजिटल भुगतान, मार्केटिंग और बिज़नेस बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए जाते हैं।
18 सितंबर 2026 तक के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में करीब 24.50 लाख कारीगर अपनी बेसिक स्किल ट्रेनिंग पूरी कर चुके थे।
आवेदन की प्रक्रिया: फॉर्म भरने के बाद आगे क्या होता है?
PM Vishwakarma Yojana के लिए पंजीकरण नजदीकी Common Service Centre (CSC) यानी जन सेवा केंद्र के माध्यम से किया जाता है। आवेदन के दौरान पहचान पत्र (आधार), मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी और अपने काम से जुड़ा विवरण देना होता है।
लेकिन यहां एक छोटी मगर बेहद काम की बात समझना जरूरी है—पंजीकरण होना और योजना का पूरा लाभ मिल जाना दो अलग-अलग बातें हैं।
फॉर्म भरने के बाद आपका आवेदन तीन चरणों के सत्यापन (Verification) से गुजरता है:
- सबसे पहले, ग्राम पंचायत या स्थानीय शहरी निकाय स्तर पर आपके काम की जमीनी पुष्टि होती है।
- इसके बाद, जिला स्तर की समिति आपके दस्तावेज और पात्रता जांचती है।
- अंत में, स्क्रीनिंग कमेटी की मंजूरी के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
सत्यापन की यह निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही टूलकिट, ट्रेनिंग और लोन से जुड़ी आगे की कार्रवाई की जाती है।
इस योजना के बारे में अधिक जानकारी और आवेदन करने के लिए सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते है।
कारोबार बढ़ाने के लिए Loan
अब बात उस सुविधा की, जिसके बारे में सबसे ज्यादा सवाल पूछे जाते हैं—Loan।
मान लीजिए किसी कारीगर के पास काम है, ग्राहक भी हैं, लेकिन कारोबार को थोड़ा आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत है। नया औजार खरीदना है, कच्चा माल लेना है या काम की जगह में कुछ सुधार करना है। ऐसी स्थिति में ऋण उसके काम आ सकता है।
PM Vishwakarma में Collateral-free Enterprise Development Loan की व्यवस्था की गई है। पहले चरण में ₹1 लाख तक और दूसरे चरण में ₹2 लाख तक के ऋण का प्रावधान है। दोनों चरणों को मिलाकर यह राशि ₹3 लाख तक हो सकती है। ब्याज दर 5 प्रतिशत रखी गई है।
लेकिन यहां भी एक बात साफ समझनी चाहिए।
₹3 लाख की सीमा का मतलब यह नहीं है कि योजना में पंजीकरण कराने वाले हर कारीगर को सीधे ₹3 लाख मिल जाएंगे। ऋण चरणबद्ध तरीके से मिलता है और उसके लिए निर्धारित पात्रता और प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
15 सितंबर 2026 तक सरकारी जानकारी के अनुसार 6.19 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके थे और इनकी कुल राशि करीब ₹5,316 करोड़ थी।
Digital Payment का छोटा लेकिन अलग फायदा
आज छोटे से छोटे कारोबार में भी UPI और डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है। इसी दिशा में PM Vishwakarma Yojana के तहत कारीगरों को डिजिटल लेन-देन अपनाने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान रखा गया है।
निर्धारित शर्तों के तहत पात्र कारीगरों को हर डिजिटल लेन-देन पर ₹1 का प्रोत्साहन (Incentive) मिलता है। यह लाभ हर महीने अधिकतम 100 लेन-देन तक सीमित है।
भले ही यह राशि छोटी लगे, लेकिन इसका असल मकसद केवल वित्तीय लाभ देना नहीं, बल्कि कारीगरों को आधुनिक डिजिटल व्यवस्था और वित्तीय साक्षरता से जोड़ना है।
इसके साथ ही कारीगरों को बड़े बाजार तक पहुंचाने (Market Access) पर भी विशेष जोर दिया गया है। सरकारी पहलों के तहत GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस), ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, ट्रेड फेयर और प्रदर्शनियों के माध्यम से उनके हुनर को नए ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
क्योंकि आखिरकार, बेहतरीन सामान बनाना एक हुनर है, और उसे सही ग्राहकों तक पहुंचाना उससे भी बड़ा कौशल!
2026 में योजना की तस्वीर
15 सितंबर 2026 तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों को देखें तो योजना की स्थिति कुछ इस तरह थी:
| स्थिति | संख्या |
|---|---|
| पंजीकरण लक्ष्य | 30 लाख |
| बेसिक ट्रेनिंग पूरी | 24.37 लाख+ |
| टूलकिट प्राप्त करने वाले | 18.16 लाख+ |
| स्वीकृत ऋण | 6.19 लाख+ |
| स्वीकृत ऋण की राशि | लगभग ₹5,316 करोड़ |
इसके बाद 18 सितंबर 2026 को जारी सरकारी जानकारी में करीब 24.50 लाख कारीगरों के बेसिक प्रशिक्षण की जानकारी दी गई। तारीख अलग होने के कारण आंकड़ों में थोड़ा अंतर दिखाई देता है।
इसलिए किसी सरकारी योजना के आंकड़े पढ़ते समय सिर्फ संख्या देखने के बजाय उस आंकड़े की तारीख भी देखना जरूरी है।
30 लाख रजिस्ट्रेशन का मतलब 30 लाख Loan नहीं
यह बात अलग से समझ लेना जरूरी है, क्योंकि योजना के आंकड़ों को लेकर भ्रम होना आसान है।
30 लाख रजिस्ट्रेशन का अर्थ यह नहीं है कि 30 लाख कारीगरों को ₹3 लाख का Loan मिल चुका है।
रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, टूलकिट और Loan—ये सभी अलग-अलग चरण और आंकड़े हैं।
उदाहरण के लिए 15 सितंबर तक 30 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 6.19 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत होने की जानकारी दी गई थी।
इसलिए अगर कहीं आपको सिर्फ इतना लिखा मिले कि “30 लाख कारीगरों को ₹3 लाख Loan मिला”, तो उस दावे को तुरंत सही मानने के बजाय सरकारी आंकड़े और उसकी तारीख देखना बेहतर रहेगा।
हर कारीगर की जरूरत अलग है
योजना को सिर्फ “₹3 लाख का Loan” कहकर समझना अधूरा होगा।
एक दर्जी के लिए नई मशीन ज्यादा उपयोगी हो सकती है। बढ़ई को बेहतर औजारों की जरूरत हो सकती है। किसी कारीगर के लिए ट्रेनिंग सबसे ज्यादा काम की हो सकती है, जबकि कोई दूसरा अपने बनाए सामान को नए बाजार तक पहुंचाना चाहता हो।
यानी योजना में पहचान, ट्रेनिंग, टूलकिट, ऋण, डिजिटल भुगतान और बाजार—इन अलग-अलग जरूरतों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।
यही वजह है कि इसका फायदा हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होगा।
आगे असली परीक्षा कारोबार की होगी
तीन साल में 30 लाख रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य पूरा होना और लाखों कारीगरों का प्रशिक्षण लेना योजना की पहुंच दिखाता है। लेकिन किसी भी ऐसी योजना का असर केवल रजिस्ट्रेशन की संख्या से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता।
आगे यह देखना ज्यादा दिलचस्प होगा कि बेहतर औजार मिलने के बाद काम की गुणवत्ता और उत्पादकता में कितना बदलाव आता है। ट्रेनिंग लेने वाले कितने कारीगर नई तकनीक अपनाते हैं। जिन लोगों ने Loan लिया है, उनके कारोबार में उसका क्या उपयोग हुआ। और बाजार से जुड़ने के बाद कितने कारीगर अपने ग्राहक बढ़ा पाते हैं।
इन सवालों के जवाब समय के साथ ज्यादा साफ होंगे।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि PM Vishwakarma को सिर्फ एक Loan योजना समझना सही नहीं होगा। इसमें पारंपरिक कारीगर की पहचान से लेकर उसके हुनर, औजार, पूंजी, डिजिटल लेनदेन और बाजार तक पहुंच—कई पहलुओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।
निष्कर्ष
PM Vishwakarma Yojana का उद्देश्य केवल कारीगरों को ऋण उपलब्ध कराना नहीं है। योजना में पहचान, प्रशिक्षण, टूलकिट, सस्ता ऋण, डिजिटल भुगतान और बाजार तक पहुंच जैसे अलग-अलग पहलुओं को जोड़ा गया है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि योजना के तहत लाखों कारीगर पंजीकृत हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग ट्रेनिंग तथा टूलकिट का लाभ ले चुके हैं। लेकिन किसी कारीगर के लिए असली फायदा तभी माना जाएगा, जब इन सुविधाओं से उसका काम आसान हो, कारोबार बढ़े और कमाई के नए रास्ते बनें।
इसलिए योजना को समझते समय सिर्फ ₹3 लाख Loan पर ध्यान देने के बजाय यह देखना ज्यादा जरूरी है कि आपके काम के हिसाब से इसमें कौन-सी सुविधा वास्तव में उपयोगी है।
आपका अनुभव भी मायने रखता है
अगर आप खुद कारीगर हैं या आपके परिवार में कोई PM Vishwakarma Yojana से जुड़ा है, तो आपका अनुभव दूसरों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। योजना के तहत आपको क्या फायदा मिला, आवेदन में कोई परेशानी आई या Training और Toolkit से काम में कोई बदलाव हुआ—अपना अनुभव कमेंट में जरूर बताएं।
नोट: योजना की पात्रता, नियम और आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। आवेदन करने से पहले संबंधित सरकारी स्रोत या CSC से नवीनतम जानकारी जरूर जांच लें।
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